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Unstable WiFi connection ko kaise theek karein


कई परिस्थितियों में हमारा WiFi कनेक्शन अनस्टेबल यानी आता-जाता रहता है. ऐसा तब हो सकता है यदि ऑपरेटर के नेटवर्क के साथ किसी तरह की समस्या हो. ऐसा अनस्टेबल पावर सोर्स के कारण भी हो सकता है. इसके अलावा, वाई-फाई का अनस्टेबल होना किन्हीं दूसरे संबंधित नेटवर्क के कारण भी हो सकता है.



यूजर के Wi-Fi कार्ड में कोई गड़बड़ी है तो भी ये दिक्कत सकती है. ऑपरेटर की गड़बड़ फ्रीक्वेंसी से भी कनेक्शन गड़बड़ हो सकता है. किसी खास नेटवर्क में कॉर्डलेस फोन</bold> भी वाई-फाई के कनेक्शन में दिक्कत ला सकता है. कई यूजर्स USB एक्सटेंशन केबल का इस्तेमाल करते हैं, ये भी एक वजह हो सकती है.

यदि आपका वायरलेस कनेक्शन नियमित रूप से डिस्कनेक्ट और रीकनेक्ट होता है, तो ऐसा कुछ इन वजहों से हो सकता है:

पहला केस

  • बिजली के कारण गड़बड़ी: इस परिस्थिति में आपको आस-पास की चीजें हटाते हुए जितना अधिक संभव हो प्वाइंट को एक्सेस करना होगा. ये बात ध्यान रखें कि लोड-बियरिंग वॉल या कंक्रीट की दीवारें सिंग्नल को भारी पैमाने पर कमजोर करती हैं. यदि ये MIMO एक्सेस प्वाइंट है, तो एंटीना को जरूर ओरिएंटेट करें.

दूसरा केस

  • दूसरे वायरलेस नेटवर्क होने की संभावना: यदि कई सारे नेटवर्क एक के बाद एक साथ में हों तो इससे गड़बड़ी पैदा होती है. इसलिए सलाह दी जाती है कि ब्रॉडकास्ट चैनल के डिफॉल्ट एक्सेस प्वाइंट को बदल दें ताकि गड़बड़ी कम से कम हो. नेटवर्क का नाम (SSID) बाई डिफॉल्ट बदलना ना भूलें.

तीसरा केस

  • WiFi कार्ड को इस्तेमाल करने में समस्या: इसके लिए नेटवर्क कनेक्शन (वाई-फाई) के प्रॉपर्टीज में जाकर, Advanced टैब को क्लिक करें, फिर "Allow the system to turn off this device" को अनचेक कर दें.

चौथा केस

  • फ्रिक्वेंसी ठीक ना हो: WiFi रिसीवर के कुछ ब्रांड वाई-फाई एक्सेस प्वाइंट द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले चैनल को पसंद करते हैं. इस तरह मोडेम से केवल दो या तीन मीटर की दूरी पर होने से भी, कुछ ब्रांड का कनेक्शन अनस्टेबल होता है. कुल मिला कर देखें तो हम कुछ चैनल को टेस्ट कर सकते हैं, जैसे: 5, 6, 7, 10, 11 या 12. सेंट्रिनोज (हाल ही में पोर्टेबल से इंटीग्रेट किए गए रिसीवर्स) हाई चैनल: 10 या 11 पर ज्यादा बेहतर तरीके से काम करते हैं. ऐसा Dlink, Netgear, Linksys के साथ हो सकता है.

पांचवां केस

  • DECT कॉर्डलेस फोन से जोड़ा गया इंटरफेस: DECT उतना ही फ्रीक्वेंसी बैंड 2.4 GHz (माइक्रोवेव ओवन भी वाई-फाई वेव्स को रोक सकता है) का इस्तेमाल करता है जितना कि वाई-फाई. यदि आपका DECT का बेस मोडेम (एक मीटर दूर) के पास स्थित है, तो दो ट्रांसमीटर एक दूसरे के काम में रुकावट पैदा कर सकते हैं. नतीजा: आपके WiFi का डिस्कनेक्शन और फोन लाइन में रुकावट. यदि स्टेबल यानी स्थायी वाई-फाई चाहते हैं तो DECT का बेस वहां से हटा दें. इससे टेलीफोन लाइन भी पहले से बेहतर काम करने लगेगी.

छठा केस

  • USB एक्सटेंशन केबल का उपयोग: WiFi डॉन्गल (USB) बनाने वाले यूएसबी की के साथ कनेक्ट करने के लिए एक एक्सटेंशन कॉर्ड मुहैया करते हैं. इस एक्सटेंशन से कुछ दिक्कत पेश आ सकती है. इसलिए एक्सटेंशन के बिना काम करें.

सातवां केस

  • अस्थायी नेटवर्क प्रोटोकॉल: कुछ नेटवर्क प्रोटोकॉल्स ( जैसे Aegis) वाई फाई कनेक्शन में अनस्टेबल रहते हैं. इनसे कनेक्शन कट सकता है. बस इन्हें अनइंस्टॉल कर दें. ये करने के लिए पहले आपको वायरलेस कनेक्शन की प्रॉपर्टीज में जाना होगा. वहां जेनरल टैब में कॉरेसपॉन्डिंग लाइन को सलेक्ट कीजिए और फिर नीचे दिए गए uninstall ऑप्शन को क्लिक कर दीजिए.

आठवां केस

  • कैमरा: वायरलेस कैमरा 2.4Ghz की वायरलेस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है- वाई-फाई भी इतना ही स्पेक्ट्रम का उपयोग करता है, और DECT फोन भी. इस तरह के सिस्टम वाई-फाई कनेक्शन में व्यवधान पैदा करते हैं.


Photo: © cunaplus - Shutterstock.com
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CCM पर आने वाली सारी जानकारियों को जीन फ़्रांसवा पिलाओ की अगुआई में आईटी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर तैयार करते हैं. जीन फ़्रांसवा पिलाओ CCM के संस्थापक और Figaro Group के डिजिटल डायरेक्टर हैं. CCM फ्रांस की नंबर वन टेक वेबसाइट है. ये 11 भाषाओं में उपलब्ध है.

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