'4 साल के बच्चे के हाथ में भरी बंदूक जैसा है Retweet'

स्वर्णकांता - 30 जुलाई, 2019 - पूर्वाह्न 11:12 IST बजे
'4 साल के बच्चे के हाथ में भरी बंदूक जैसा है Retweet'
Twitter का Retweet बटन बनाने वाले ने इसे 'भरी हूई बंदूक' बताया है.

(CCM) — Retweet बटन बनाने वाले मशहूर डेवलपर क्रिस वेदरेल आज इसे बनाने के लिए पछता रहे हैं. बज़फीड से बातचीत में ये बात सामने आई है. डेवलपर के मुताबिक Retweet से ट्विटर मॉब को बढ़ावा मिला है.

पिछले दिनों नफरत फैलाने वाली भाषा, गुंडागर्दी और फर्जी खबरों के लिए Twitter को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.

वायरल कंटेन्ट ट्रैक करने वाली अमेरिकी वेबसाइट बज़फीड से बातचीत में डेवलपर क्रिस ने माना कि उन्हें रीट्विट बटन बनाने का पछतावा है. वे मानते हैं कि ट्विटर मॉब ने इसका जिस तरह इस्तेमाल किया है वो ऐसा है जैसे कि “हमने चार साल के बच्चे के हाथों में भरी हुई बंदूक दे दी.”

वेदरेल के ट्विटर के साथ जुड़ने के पहले लोग मैनुअली एक दूसरे को रीट्विट करते थे. वे पहले टेक्स्ट को कॉपी करते, फिर नए विंडो में पेस्ट करते, “RT” टाइप करते फिर ओरिजिनल ट्विटर हैंडल के साथ इसे आगे भेज देते. अब रीट्विट बटन आने के बाद ट्विटर पर ये सब करना आसान हो गया. जब से ये प्रोसेस ऑटोमेटेड हुआ, रीट्विट कर किसी भी पोस्ट को मिनटों में वायरल किया जा सकता है.

जाने माने टेक डेवलपर वेदरेल ट्विटर टीम के लीडर हैं. रीट्विट बटन की खोज साल 2009 में की गयी थी. पिछले दस साल से ये बटन ट्विटर के बेहद जरूरी फीचर्स में से एक बन चुका है. लेकिन जैसा कि वेदरेल कहते हैं, "इसे सुधारने की जरूरत है. क्योंकि सोशल मीडिया खत्म हो चुका है. रीट्विट इसकी बड़ी वजह है."

केवल वेदरेल ही रिट्वीट के बारे में ऐसा नहीं सोच रहे हैं. ट्विटर सीईओ जैक डोरसी का भी कहना है, “बेशक हमें रिट्विट के पर ध्यान देना होगा. किसी भी ट्विट को रीट्विट करने से पहले हमें अधिक सोच-विचार करने की जरूरत है.”

जैक डोरसी ने इससे पहले लाइक्स और फॉलो को खत्म करने की जरूरत बताई थी.

ट्विटर के प्रोडक्ट हेड जेसन गोल्डमैन भी इस बात पर जोर देते हैं कि "आज रीट्विट के साथ कमेंट करना सबसे बड़ी समस्या बन गयी है." हालांकि उनका ये भी मानना है कि केवल रीट्विट ही ट्विटर की बुराइयों की जड़ नहीं है.

वेदरेल की कहानी कुछ 10 साल पहले शुरू हुई. वो साल 2009 में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में ट्विटर से जुड़े थे. इससे पहले वे गूगल में थे और Google Reader का निर्माण कर चुके थे.

उन्होंने बज़फीड को बताया कि उन्होंने रीट्विट बटन को बनाते समय सोचा था कि ये कमजोर लोगों की आवाज बनेगा.

डेवलपर क्रिस वेदरेल का कहना है कि ट्विटर में किसी ने इस बात की कल्पना नहीं की थी कि ये फीचर प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने के तरीके को इस कदर बदल देगा.

वैसे कुछ रीट्विट जिसमें किसी प्राकृतिक आपदा के बारे में जानकारी दी गयी है, उसका वायरल होना
अच्छा है. लेकिन हर ट्विट अच्छे नहीं होते. अब तनाव, हिंसा और नफरत फैलाने वाले पोस्ट को रीट्विट करके वायरल करना आसान हो गया है. इसका असर बहुत नकारात्मक पड़ रहा है. मॉब लिंचिंग की ही तरह ट्विटर मॉब और लिंचिंग जैसी स्थितियां पैदा हो गई हैं.

पिछले दिनों खेल जगत में Gamergate नाम से सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न अभियान चलाया गया. ये एक उदाहरण है कि कैसे लोग मिल कर हमले करने के लिए रीट्विट का इस्तेमाल कर रहे हैं. वेदरेल ने इसे "खौफनाक स्टोरी" बताया.

उनका कहना है, "मुझे समझ में आया कि ये कोई छोटे समूह का किया गया अभद्र व्यवहार नहीं था. बल्कि लोगों की भीड़ ऐसे ही पेश आती है. ये देखकर मैं कांप गया हूं."

2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के बाद ट्विटर और फेसबुक दोनों पर बड़े पैमाने पर झूठ और अफवाहों का बाजार गर्म रहा. इसके बाद दुनिया भर में दोनों प्लेटफार्म सरकार की जांच के दायरे में आ गए.

ट्विटर इस बात को लेकर दबाव में है कि कैसे इस प्लेटफार्म को तनाव से दूर रखा जाए.

TED (technology, entertainment एंड design) कांफ्रेंस में पिछले साल संस्थापक जैक डोरसी ने बताया था कि, कंपनी लाइक्स और फॉलो को हटाने पर विचार कर रही है. साथ ही उन्होंने ये भी इच्छा जाहिर की थी कि काश ये बटन ट्विटर पर नहीं होते!

उन्होंने माना है कि मौजूदा दौर में ट्विटर लोगों को "तनाव वाली बातें पोस्ट" करने के लिए प्रोत्साहित करता है.

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