TikTok या PUBG- डिजिटल लत से ऐसे उबरें

TikTok या PUBG- डिजिटल लत से ऐसे उबरें
जानकारों के मुताबिक डिजिटल एडिक्शन की लत से छुटकारा पाया जा सकता है.

(CCM) — TikTok या PUBG जैसे ऐप जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्ते में चार घंटे इनसे दूर रहकर इनकी लत से छुटकारा पाया जा सकता है.

आइए इस हानिकारक डिजिटल लत से बचने के और तरीकों के बारे में जानते हैं. मनोचिकित्सकों ने बच्चों और बड़ों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बढ़ते उपयोग के प्रति चिंता जाहिर करते हुए आगाह किया है कि इनकी आदत या लत नशे की लत जैसी खतरनाक हो सकती है.

अभी पिछले सप्ताह ही टिकटॉक खेलने से रोकने पर तमिलनाडु में 24 साल की एक मां के आत्महत्या करने की मामला सामने आया है. इसी तरह मध्यप्रदेश में पिछले महीने ही लगातार छह घंटे पबजी खेलने के बाद एक 16 साल के लड़के की हार्ट अटैक में मौत हो गई.

जानकारों का कहना है कि गेम, ऐप या स्मार्टफोन की लत से छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि इस समस्या को महसूस किया जाए, उसे स्वीकार किया जाए.

फोर्टिस हेल्थकेयर के मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यावहारिक विज्ञान विभाग के निदेशक समीर पारिख के मुताबिक, “आपके लिए दो बातें ध्यान में रखनी सबसे जरूरी है. पहली, आउटडोर और इनडोर लाइफ, सामाजिक व्यवस्तताएं और काम के बीच तारतम्य बनाए रखना है. दूसरी, ये देखना जरूरी है कि आप पूरी नींद ले रहे हैं, या नहीं.”

पारिख ने इस लत से उबरने के लिए हर हफ्ते चार घंटे इन गैजेट्स से दूर रहने की भी सलाह दी है. उनका कहना है कि आप चार घंटे के इस ''डिजिटल डिटॉक्स'' के दौरान अपने फोन या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूर रहें. उनके मुताबिक यदि आप इन चार घंटों में गैजेट्स से दूर रहने में मुश्किल पाते हैं तो आपको सतर्क हो जाने की जरूरत है.

दूसरी ओर नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में मनोचिकित्सा विभाग के सीनियर कंसल्टेंट संदीप वोहरा का कहना है, “डिजिटल लत के लक्षण ये हैं कि आप अपने गैजेट्स से दूर रहते हुए भी हमेशा उसी के बारे में सोचते हैं, या जब आप इसे इस्तेमाल नहीं करते तो आप चिड़चिड़ाहट के शिकार होते हैं, या आपसे नींद दूर चली जाती है.”

वोहरा के मुताबिक "डिजिटल लत किसी भी नशे की लत जितना ही बुरा है. यदि आप रोजमर्रा की जिंदगी और रुटीन से दूर हो गए हैं तो इसका मतलब आप इस लत के शिकार हो गए हैं. यानी आप हमेशा स्क्रीन के भरोसे हैं."

डिजिटल लत के शिकार लोग निजी साफ-सफाई की उपेक्षा करने लगते हैं, परिजनों-दोस्तों से संवाद बंद कर देते हैं. अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से भी जी चुराने लगते हैं. वे बेचैनी, अवसाद, अनिद्रा, चिंता, ध्यान न लगा पाने जैसी समस्या से पीड़ित रहते हैं.

जानकारों के मुताबिक इस लत से न केवल बड़े बल्कि छोटे बच्चे भी ग्रसित हो रहे हैं. छोटे बच्चों में गेमिंग डिवाइस और स्मार्टफोन का एडिक्शन सामने आ रहा है. ऐसे में सलाह दी जा रही है कि माता-पिता और अभिभावक सतर्क रहें कि बच्चा कहीं स्क्रीन पर तो ज्यादा समय नहीं बिता रहा, या डिजिटल एक्सेस ना मिलने पर कहीं वो चिड़चिड़ाहट का शिकार तो नहीं हो रहा. ये सब लत के लक्षण हैं.

पारिख की सलाह है, "पेरेंट्स बच्चों को ज्यादा से ज्यादा आउटडोर एक्टिविटी में लगाएं, क्योंकि इनडोर में बच्चों में डिजिटल लत पड़ने की अधिक संभावना होती है. वे बच्चों को दोस्तों, परिजनों से मिलने या बाहर जाकर कोई गेम खेलने के लिए उत्साहित करें. उन्हें सोशल होने के लिए उत्साहित करें. रीडिंग जैसे शौक भी इनडोर में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए बेस्ट उपाय है."

वोहरा के मुताबिक यदि माता-पिता को लगता है कि बच्चा जरूरत से ज्यादा समय स्क्रीन पर बिता रहा है तो सबसे पहले बच्चों के साथ बातचीत करना जरूरी है. उनसे बात करके उन्हें मीडिया पर बिताए जा रहे समय में कटौती करने की सलाह दी जा सकती है.

साथ ही वोहरा आगाह करते हैं कि यदि संवाद, सलाह-मशविरे के बावजूद माता-पिता पाते हैं कि बच्चा उनसे झूठ बोलकर स्क्रीन पर ज्यादा समय बिता रहा है तो ऐसे में किसी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से संपर्क करना बेहतर होगा.

Photo: © parilovv - 123rf.com
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