उड़ान के दौरान भी Jio यूजर्स को मिलेगी कनेक्टिविटी

स्वर्णकांता - 16 अप्रेल, 2019 - अपराह्न 09:42 IST बजे
उड़ान के दौरान भी Jio यूजर्स को मिलेगी कनेक्टिविटी
Jio यूजर्स जल्दी ही फ्लाइट के दौरान इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे.

(CCM) —भारत की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी Reliance Jio Infocomm ने फ्लाइट में कनेक्टिविटी लाइसेंस के लिए दूरसंचार विभाग को आवेदन भेजा है. विभाग को जियो के अलावा कई दूसरी कंपनियों के भी आवेदन मिले हैं.

हाल ही में दूरसंचार विभाग की ओर से भारती एयरटेल की सहायक इंडो टेलीपोर्ट्स लिमिटेड को 10 साल के लिए इन-फ्लाइट और मेरीटाइम कनेक्टिविटी लाइसेंस मिला है. लाइसेंस मिलने के बाद सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियां भारतीय और विदेशी एयरलाइनों को कनेक्टिविटी और डेटा सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी.

मिल रही खबरों के मुताबिक दूरसंचार विभाग को ओर्टस कम्युनिकेशन्स, स्टेशन सैटकॉम और क्लाउड कास्ट डिजिटल सहित कई कंपनियों ने आवेदन भेजे हैं. पिछले साल दिसंबर में सरकार की ओर से इन-फ्लाइट पर नियम के ऐलान के बाद Bharti Airtel, Hughes Communications India, और Tatanet Services जैसी कंपनियां लाइसेंस के लिए कतार में खड़ी हैं.

इस साल फरवरी में, Hughes Communications India (HCIL) भारत में इन-फ्लाइट और मेरिटाइम कनेक्टिविटी पाने वाली पहली कंपनी बन गई है. इसके बाद, अगले ही महीने Tatanet Services ने ये ऐलान किया था कि सरकार की ओर से उन्हें भी इन-फ्लाइट और मेरिटाइम कनेक्टिविटी के लिए लाइसेंस मिल गया है.

हालांकि, रिलायंस जियो ने इस मामले में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है. सूत्रों के मुताबिक दूरसंचार विभाग ने ओर्टस कम्युनिकेशन सहित कुछ मामलों में आवेदकों से स्पष्टीकरण मांगे हैं.

पिछले साल दिसंबर में सरकार ने भारतीय वायु क्षेत्र में उड़ान सेवाओं के साथ-साथ समुद्र में मोबाइल फोन सेवाओं के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित कर दिया था.

आखिर फ्लाइट में इंटरनेट और कालिंग कैसे काम करेगा. बता दें कि जब आप आकाश में काफी ऊंचाई पर उड़ रहे होते हैं तो आपके डिवाइस तक इंटरनेट सिग्नल दो तरीके से पहुंचता है. पहला, मोबाइल ब्रॉडबैंड टावर और दूसरा, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की मदद से. सबसे पहले तरीके में नीचे जमीन पर मौजूद मोबाइल टावर्स विमान के एंटिना को सिग्नल भेजते हैं. जैसे-जैसे प्लेन का लोकेशन बदलता है, प्लेन अपने आप सबसे नजदीक के टावर का सिग्नल पकड़ता है. लेकिन अगर आप पानी वाले या रिमोट एरिया से निकल रहे हैं तो कनेक्टिविटी एक बड़ी परेशानी हो सकती है. ऐसे में दूसरा तरीका काम आता है.

प्लेन सैटेलाइट्स से कनेक्ट करते हैं और धरती पर रिसीवर्स और ट्रांसमीटर्स के जरिए सिग्नल्स सेंड और रिसीव करते हैं. ये स्टैलाइट्स वही हैं, जिन्हें टेलीविजन सिग्नल्स, मौसम की जानकारी और मिलिट्री ऑपरेशन्स पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. आपके स्मार्टफोन से एयरक्राफ्ट के ऊपर लगे एंटेना की मदद से नजदीकी सैटेलाइट सिग्नल से कनेक्ट किया जाता है.

Photo: © Jio.