लोकसभा चुनाव 2019, Facebook ने कमर कसी

स्वर्णकांता - 28 मार्च, 2019 - अपराह्न 02:02 IST बजे
लोकसभा चुनाव 2019, Facebook ने कमर कसी
Facebook लोकसभा चुनाव के दौरान झूठी खबरों पर लगाम लगाएगा.

(CCM) — दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफार्म Facebook ने झूठी और गुमराह करने वाली खबरों को फ्लैग करने और रोक लगाने के लिए इंडियन मीडिया ऑर्गनाइजेशन से पार्टनरशिप की है. भारत में लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं और 19 मई को खत्म होंगे.

फेसबुक ने इस बार अपने प्लेटफार्म पर भारत में लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार अभियान, वोटिंग, मतगणना के बीच किसी तरह की गड़बड़ी पर नजर रखने और रोक लगाने की ठानी है. साथ ही कंपनी ने एक नया फीचर 'कैंडिडेट कनेक्ट' भी शुरू किया है.

'कैंडिडेट कनेक्ट' फीचर की मदद से लोकसभा उम्मीदवार अपने चुनावी वादों को 20 सेकेंड के वीडियो में रिकॉर्ड कर सकता है. इससे मतदान करने वालों को पूरी जानकारी मिलेगी. फेसबुक ने फर्जी और गुमराह करने वाली पहले की खबरों को हटाना शुरू कर दिया है.

फेसबुक के प्रोडक्ट मैनेजर समिध चक्रबर्ती ने भारतीय चुनाव को “टॉप प्रायोरिटी” बताते हुए कहा है कि वो पिछले दो सालों से चुनाव के लिए पुरजोर तैयारी कर रहा है. उन्होंने बताया कि भारत में चुनाव के दौरान अंग्रेज, हिंदी और कुछ दूसरे भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में लिखी जाने वाली झूठी स्टोरीज को फ्लैग करने और उन पर रोक लगाने के लिए फेसबुक ने इंडियन मीडिया ऑर्गनाइजेशन से हाथ मिलाया है.

चक्रबर्ती का कहना है कि जैसे ही फैक्ट-चेकर किसी झूठी खबर या जानकारी को फ्लैग करेगा, फेसबुक इसे किसी यूजर के न्यूजफीड में 80% कम दिखाएगा.

सोशल मीडिया दिग्गज को 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान सोशल नेटवर्क के ज़रिए कथित रूसी हस्तक्षेप के सबूत मिले थे. जिसके बाद से फेक न्यूज़ के प्रसार में भूमिका को लेकर फेसबुक सवालों के घेरे में है. झूठी खबरों पर लगाम लगाने में असफल होने पर उसे काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग को अमेरिकी सीनेट में सवालों का जवाब भी देने की नौबत आई. बीते अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में सोशल नेटवर्क के ज़रिए कथित रूसी हस्तक्षेप के सबूत मिले थे. जिसके बाद से फेक न्यूज़ के प्रसार में भूमिका को लेकर फेसबुक सवालों के घेरे में है.

इधर फेसबुक के मालिकाना हक वाले व्हाट्सऐप को भी भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियो की ओर से जांच का सामना करना पड़ा. व्हाट्सऐप पर झूठी जानकारियां और भ्रम फैलाने के आरोप लगे. इनके कारण मॉब किलिंग जैसी घटनाएं भी हुईं.

साल 2018 में भारत में, अधिकांशतः ग्रामीण इलाकों में, सोशल मीडिया की ओर से फैलाए गए फेक न्यूज के कारण कम से कम 20 लोग मारे गए. इन पर रोकथाम के लिए अब व्हाट्सऐप ने मैसेज फॉरवर्ड करने वाले यूजर की संख्या 5 तक सीमित कर दी. पहले एक मैसेज को 256 लोगों तक फॉरवर्ड किया जा सकता था.

वैसे तो व्हाट्सऐप ने ये कदम भारत के लिए उठाया था, लेकिन बाद में इसे जनवरी में दुनिया भर में लागू कर दिया गया.

भारत के चुनाव प्रचार अभियान में सोशल मीडिया की बेहद अहम और नाजुक भूमिका हो गई है. सोशल मीडिया की मदद से चुनाव के लिए प्रचार अभियान तेजी से बढ़ा है. युवा वोटर को रिझाने के लिए इसके जरिए राजनीतिक विज्ञापनों में स्लोगन, गीत और इंटरैक्टिव फीचर्स की मदद ली जा रही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने युवा मतदाताओं से संपर्क करने और अपने राजनीतिक विचारों का प्रचार-प्रसार करने के लिए सोशल मीडिया का जम कर इस्तेमाल किया.

भारत के चुनाव आयोग गूगल, ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के दिग्गज प्लेटफार्म पर लगाम कसने की कोशिश करता रहा है ताकि चुनाम में अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के मकसद से दी जा रही जानकारियों पर रोक लगायी जा सके.

सोशल मीडिया कंपनियों ने इस साल नए सिरे से चुनाव पर निगरानी रखने वाले निकायों को “Voluntary Code of Ethics for the General Elections 2019” पेश किया है.

चक्रबर्ती का कहना है, “हम चुनाव के इस मौसम में फेसबुक पर गलत और भ्रम फैलाने वाले लोगों को दूर रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.” उनके मुताबिक फेसबुक ने चुनाव के दौरान सेफ्टी और सेक्योरिटी के लिए काम करने वालों की संख्या बढ़ाकर तिगुनी कर दी है. अब इस काम के लिए 30,000 लोग तैनात हैं.

एक आंकड़े के मुताबिक भारत में दुनिया के सबसे अधिक फेसबुक यूजर्स हैं. इनकी संख्या 20 करोड़ से अधिक है. भारत में इस बार लोकसभा चुनाव 2091 में 90 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने वाले हैं.

लोकसभा चुनाव 2019 में 1.3 बिलियन लोग हिस्सा लेंगे. चुनाव सुरक्षित और सही तरीके से हो इसके लिए ये सात चरणों में संपन्न होगा. मतगणना 23 मई को होगी और चुनाव के नतीजे भी उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे.

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