Flipkart का 77% हिस्सा अमेरिकी Walmart का हुआ

स्वर्णकांता - 10 मई, 2018 - अपराह्न 12:16 IST बजे
Flipkart का 77% हिस्सा अमेरिकी Walmart का हुआ
अमेरिकी रिटेल चेन वॉलमार्ट ने 16 अरब डॉलर में भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart की 77% हिस्सेदारी खरीद ली है.

(CCM) — अमेरिकी रिटेलर कंपनी Walmart ने 16 अरब डॉलर यानी तकरीबन एक लाख करोड़ रुपए में भारत की सबसे बड़ी ई-शॉपिंग कंपनी Flipkart की 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है. जापानी टेक्नोलॉजी कंपनी सॉफ्टबैंक ने टोक्यो में इस सौदे का ऐलान किया है.


पांच साल पहले जब एक और अमरीकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने भारत में कदम रखा, तब से ही फ्लिपकार्ट पर दबाव बनने लगा था. अमेजन भी फ्लिपकार्ट को खरीदने की इच्छुक थी, लेकिन वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट का सौदा करने में कामयाबी हासिल कर ली. वॉलमार्ट के साथ सौदा पक्का करने से पहले अमेजन ने फ्लिपकार्ट को 12 अरब डॉलर का ऑफर देते हुए 60 फीसदी हिस्सेदारी की पेशकश की थी.

फ्लिपकार्ट में निवेश करने वाली दूसरी कंपनियां टेनसेंट, टाइगर ग्लोबल, और माइक्रोसॉफ्ट की हिस्सेदारी पहले जैसी रहेगी. उन्होंने वॉलमार्ट के साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया है.

फ्लिपकार्ट की शुरुआत 2007 में हुई. आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट 24 साल के सचिन बंसल और 23 साल के बिन्नी बंसल ने बेंगलुरू में इसकी नींव रखी. दोनों इससे पहले अमेरिकी ऑनलाइन कंपनी अमेजन में साथ काम कर चुके थे. पहले फ्लिपकार्ट केवल किताबें बेचता था. जब जापान की सॉफ्टबैंक कंपनी इससे जुड़ी तो फिर फ्लिपकार्ट ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. वो साबुन से लेकर स्मार्टफोन तक सब कुछ ऑनलाइन बेचने लगी. 2017 तक कंपनी का राजस्व 198.55 अरब रुपये हो गया. ऑनलाइन रिटेल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 38.5 फीसदी है.

इस सौदे के बाद ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है. ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन का दावा है कि ऑनलाइन सेलर्स की संख्या अभी 8 से 10 हजार है और उन्हें ये सौदा मुश्किल में डाल सकता है.

ऑनलाइन सेलर्स को चिंता है कि वॉलमार्ट उन्हें खत्म कर देगी. 500 बिलियन डॉलर की अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट का यह इतिहास रहा है कि वह लो प्राइज की रेस शुरू कर छोटे कारोबारियों को अपने रास्ते से हटा देती है. इन कारोबारियों को डर है कि वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट के माध्यम से अपने प्राइवेट खिलाड़ियों को भारतीय बाजार में उतार प्राइस वॉर शुरू कर देगा.

एसोसिएशन के महासचिव सुधीर मेहरा बताते हैं कि "वॉलमार्ट का इतिहास रहा है कि वो बहुत कम कीमत पर सामान बेचकर छोटे-मोटे कारोबारियों को अपने रास्ते से हटा देती है. उसके पास पैसे की कमी नहीं है और दुनियाभर के बाज़ारों में उसकी पहुँच है. ऐसे में वो दूसरे देशों का सस्ता सामान भारत में डंप कर देगी."

वित्तीय मामलों में रिसर्च करने वाली कंपनी मॉर्गन स्टैनली के अनुसार भारत में अगले आठ साल में ऑनलाइन कारोबार करीब 10 गुना तक बढ़ जाएगा. मतलब साल 2026 तक हमारा ऑनलाइन कारोबार 200 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है.

वॉलमार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डग मैकमिलन के मुताबिक "भारत दुनिया में सबसे आकर्षक रीटेल बाज़ारों में से एक है. हमने ऐसी कंपनी में पैसे लगाए हैं जो ई-कॉमर्स बाज़ार में बड़ा बदलाव लाई है."

साफ है कि 130 करोड़ की आबादी वाले भारत पर अमेजन और वॉलमार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों की नजर है. जानकारों के मुताबिक ऑनलाइन कारोबार में इस सौदे से कंपनियां मुश्किल में होंगी लेकिन यूजर्स के जेब के लिए ये फायदेमंद साबित हो सकता है.

Photo: © Flipkart.