जकरबर्ग ने मानी गलती, #DeleteFacebook ट्रेंड हुआ

जकरबर्ग ने मानी गलती, #DeleteFacebook ट्रेंड हुआ
फेसबुक के करोड़ों यूजर्स के डाटा चोरी मामले में मार्क जकरबर्ग ने माना है कि उनसे गलतियां हुईं.

(CCM) — फेसबुक की नींव रखने वाले मार्क जकरबर्ग ने कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल मामले में माना कि फेसबुक से गलतियां हुई हैं. उन्होंने फेसबुक पर एक बयान जारी किया है. कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल मामला सामने आने के बाद #DeleteFacebook ट्रेंड करने लगा है.

WhatsApp के को-फाउंडर ब्रायन एक्टन ने भी #Deletefacebook का सपोर्ट किया है. उन्होंने ट्वीट करके कहा है कि यह फेसबुक डिलीट करने का वक्त है. फेसबुक ने 2014 में 19 अरब डॉलर में Whatsapp को खरीद लिया था. एक्टन ने 2017 में वाट्सऐप छोड़ दिया था.

ज़करबर्ग ने स्कैंडल की खबर आने के बाद अपना पहला बयान जारी किया है. फेसबुक पोस्ट में अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा, "फ़ेसबुक को मैंने शुरू किया है और इस प्लेटफार्म पर जो भी होता है, उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं. ऐप बनाने वाले अलेग्ज़ेंडर कोगन, कैम्ब्रिज एनालिटिका और फ़ेसबुक के बीच जो हुआ वो "एक धोखा" है."

मार्क ने कहा, "आपकी जानकारियों को महफूज रखना हमारी जिम्मेदारी है. यदि हम इसमें फेल होते हैं तो आपको अपनी सेवा देने का हमें कोई हक नहीं."

उन्होंने यह भी कहा कि, "ये फेसबुक पर अपनी जानकारियां शेयर करने वालों के साथ धोखा है. उनकी जानकारियां या डाटा लीक न हो इसके लिए फेसबुक अपनी तरफ से कुछ कदम उठाने जा रहा है."

जकरबर्ग के मुताबिक फेसबुक ऐहतियात बरतते हुए अब उन सारे ऐप की जांच करेगा जिन्होंने 2014 में डाटा ऐक्सेस को लिमिट किए जाने से पहले ही बड़े पैमाने पर जानकारियां हासिल कर ली थी. संदिग्ध गतिविधियों वाले सभी ऐप्स की जांच की जाएगी.

फेसबुक का ये भी कहना है कि जिन ऐप के डेवलेपर जांच-पड़ताल के लिए राजी नहीं होंगे उन पर पाबंदी लगाई जाएगा. इसके अलावा पर्सनल डाटा का दुरुपयोग करने वाले ऐप को बैन किया जाएगा और इससे जुड़े लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी.

दरअसल कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल सामने आने के बाद से ही फेसबुक के शेयर गिरने लगे हैं. इसमें कंपनी को खरबों रुपए का नुकसान हुआ है.

कैम्ब्रिज एनालिटिकल स्कैंडल मामला आखिर है क्या? दरअसल ब्रिटेन के रिसर्च फ़र्म कैम्ब्रिज एनालिटिकल पर आरोप है कि उसने पांच करोड़ फ़ेसबुक यूज़र्स के डाटा का गलत इस्तेमाल किया. कि उसने फ़ेसबुक से मिले डाटा के सहारे 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव और ब्रिटेन में ब्रेक्ज़िट पर हुए जनमत संग्रह के नतीज़ों को प्रभावित करने की कोशिश की थी.

कैम्ब्रिज एनालिटिकल पर लगभग 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स की निजी जानकारी चुराने के आरोप लगे हैं. इन जानकारियों का चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया गया.

अमेरीका और कई यूरोपीय देशों की सरकारों ने इन खबरों पर गंभीर सवाल उठाए और फेसबुक से इसका जवाब मांगा है. वे जानना चाहते हैं कि कैंब्रिज एनालिटिकल ने डोनल्ड ट्रंप को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने में किस तरह से मदद की है.

फ़ेसबुक ने कहा है कि वह इन आरोपों की व्यापक जाँच कराएगा. तब तक कैम्ब्रिज एनालिटिकल को निलंबित कर दिया है.

Photo: © iStock
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