Aircel हो सकती है दिवालिया, 15,500 करोड़ रु. कर्ज

स्वर्णकांता - 1 मार्च, 2018 - पूर्वाह्न 11:58 IST बजे
Aircel हो सकती है दिवालिया, 15,500 करोड़ रु. कर्ज
कर्ज का बोझ और बढ़ते घाटे के बाद सेल्यूलर कंपनी Aircel ने दिवालिया होने की अर्जी डाली है.

(CCM) — टेलीकॉम कंपनी Aircel ने अपनी यूनिट्स के साथ मुंबई के एनसीएलटी यानि नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में खुद को दिवालिया करार देने के लिए अर्जी दाखिल की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक उस पर 15,500 करोड़ रुपए का कर्ज है.


Aircel के इस फैसले से न केवल इसके 5,000 कर्मचारियों पर असर पड़ेगा बल्कि वेंडर और डिस्ट्रीब्यूटर्स भी घाटे में रहेंगे. कंपनी पर लाइसेंस फी, स्पेक्ट्रम पेमेंट और टैक्स जैसी कई चीजें सरकार पर बकाया हैं.

एक बयान में Aircel ने कहा कि टेलीकॉम सेक्टर में नई कंपनियों के आने से बाजार का गणित बदल गया है. इस समय उसे काफी संकट का सामना करना पड़ रहा है. कानूनी व नियामक संबंधी चुनौतियों, कर्ज के बोझ तथा बढ़ते घाटे की वजह से कंपनी के कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा और छवि पर भी असर हुआ है.

मलेशियाई प्रमोटर मैक्सिस कम्‍यूनिकेशन्स ने कंपनी में और निवेश करने से मना कर देने से कंपनी को मजबूरन ये फैसला लेना पड़ा. मैक्सिस अपने शेयरहोल्डर्स और कर्जदाताओं के बीच कोई भी आम सहमति बनाने में नाकामयाब रही.

कंपनी ने हाल ही में 6 टेलीकॉम सर्कल्स में अपनी सेवाएं बंद की हैं. सितंबर 2016 में रिलायंस जियो के लॉन्च के बाद से एयरसेल लगातार घाटे में चल रहा था. कई सर्कल्स में कंपनी की सर्विस बंद होने की वजह से सैकड़ों लोगों के रोजगार पर संकट गहरा गया. दिसंबर 2017 के आंकड़ों के अनुसार कंपनी देश की छठी सबसे बड़ी मोबाइल सर्विस ऑपरेटर है और इसके लगभग 8.5 करोड़ उपभोक्ता देशभर में हैं.

एक सूत्र के अनुसार रिजर्व बैंक के सभी डेट रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम पर पाबंदी लगाने की वजह से एयरसेल को यह फैसला करना पड़ा. एयरसेल ने सितंबर के बाद से बैंकों को कर्ज की किस्त नहीं चुकाई है. इसलिए वे बिना प्रोविजनिंग के अब कंपनी के लोन की रीस्ट्रक्चरिंग नहीं कर सकते. बैंक नए बोर्ड के मेंबर्स चुनने और कामकाज चलाने के लिए इनसॉल्वंसी प्रफेशनल की नियुक्ति पर काम कर रहे हैं.

Photo: © iStock.