नया शोधः Video Games से हिंसा नहीं बढ़ती

स्वर्णकांता - 23 जनवरी, 2018 - अपराह्न 03:32 IST बजे
नया शोधः Video Games से हिंसा नहीं बढ़ती
यूके के एक नए शोध के मुताबिक Video Games और हिंसा के बीच कोई संबंध नहीं होता है.

(CCM) — लंदन की योर्क यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि Video Games खेलने वालों में आक्रामकता बढ़ती है इसका कोई प्रमाण नहीं है. इस शोध में करीब 3000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया है.


आमतौर पर माना जाता है कि यदि आप हिंसक वीडियो गेम खेलते हैं तो ये आपको गुस्सैल, आक्रामक और असंवेदनशील बनाता है. मतलब हिंसक वीडियो गेम का प्लेयर्स पर 'प्राइमिंग इफेक्ट' होता है.

'प्राइमिंग इफेक्ट' का मतलब वीडियो गेम में यदि हिंसा जैसी अवधारणा दिखाई गई है तो असल जिंदगी में इस अवधारणा को प्रयोग में लाना आसान होता है. माना जाता है कि यही इफेक्ट प्लेयर के व्यवहार को बदल देता है. इसी आधार पर जाने माने विज्ञानी भी मानते रहे हैं कि जिस गेम में हिंसा अधिक होगी उसके प्लेयर उतने ही अधिक आक्रामक होंगे. जबकि नए शोध के मुताबिक सच्चाई इसके एकदम विपरीत है.

योर्क यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तीन हजार से अधिक लोगों पर शोध किया. उन्होंने शोध में पाया गया कि ये जरूरी नहीं है कि हिंसक वीडियो गेम खेलने वाले का प्लेयर पर कोई निगेटिव असर हो. इससे पहले माना जाता रहा है कि वीडियो गेम जितना हिंसक होगा प्लेयर के भीतर आक्रामकता उतनी ही बढ़ेगी.

प्राइमिंग थ्योरी सही है कि नहीं ये देखने के लिए प्रतिभागियों को एक खास वीडियो गेम खेलने को कहा गया. इस गेम में प्लेयर को कार को ट्रक से भिड़ने से बचाना था या चूहे को बिल्ली से पकड़े जाने से बचाना था. गेम खेलने के बाद प्लेयर को कई तरह के ईमेजेज दिखाए गए. जैसे कि बस या कुत्ता. उनसे कहा गया कि वे उन्हें या तो गाड़ी के रूप में या जानवर के रूप में लेवल करें.

पुराना शोध कहता है कि प्लेयर गेम से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि वे इससे जुड़े ईमेजेज को कैटेगोराइज करके देखने लगते हैं. जबकि नया शोध कहता है ऐसा नहीं है. नए शोध के मुताबिक प्रतिभागी ईमेजेज को कैटेगरी में बांट कर देखने की जल्दीबाजी में नहीं होते चाहे वे गेम से खुद को कितना ही जुड़ा हुआ महसूस करें. कई मामलों में तो प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया बहुत धीमी होती है.

Photo: © Cuphead_StudioMDHR Entertainment.