सराहा - मानसिक दिवालियेपन को मिला नया प्लेटफॉर्म

सराहा - मानसिक दिवालियेपन को मिला नया प्लेटफॉर्म
सऊदी अरब में चर्चित होने के बाद सराहा ऐप भारत में भी वायरल हो चुका है. पर इस ऐप को लेकर चिंता जताई जा रही है.

(CCM) — सऊदी अरब के एक इंजीनियर ने सराहा नाम का ऐप डिजाइन किया. इसकी मदद से आप बिना पहचान जाहिर किए लोगों से आपके बारे में राय ले सकते हैं. फेसबुक टाइमलाइन आज कल ऐसे ही पोस्ट से गुलजार है. पर ये खतरनाक भी हो सकता है.

सराहा को इसी साल फ़रवरी में शुरू किया गया था. इसकी शुरुआत तब हुई जब सऊदी डेवेलपर जैन अल-अबिदीन तौफीक ने इसको वेबसाइट के रूप में लांच किया. इसके बाद 13 जून को ऐप तैयार हुआ और वायरल हो गया. आपकी टाइमलाइन पर जब कोई भी मित्र इसके बारे में पोस्ट करता है तो आप सराहा वेबसाइट पर उसके प्रोफ़ाइल के लिंक पर रीडायरेक्ट किए जाते हैं.

भारत में तो हर कोई इस प्लेटफॉर्म का दीवाना-सा बनता जा रहा है. इस प्लेटफार्म के जरिए लड़कियों को प्रोपोजल तक आ रहे हैं. वहीं लड़कों को नसीहतें भी दी जा रही हैं. पर इस ऐप पर चीजें इतनी आसान या सहज भी नहीं हैं.

दरअसल इस ऐप का गलत प्रयोग धड़ल्ले से शुरू हो चुका है. लोग इसके माध्यम से लड़कियों को भद्दे मैसेज भेज रहे हैं. एक पुरुष प्रधान देश में लोगों को अपनी पहचान छिपाकर बुरी मानसिकता का खुला प्रदर्शन करने का मौका मिल रहा है.

किसी मैसेज में किसी महिला के कपड़ों से दिक्कत की बात लिखी गई है तो किसी में लड़की के अन्य पुरुष मित्र से दोस्ती के बारे में उलटी-सीधी बातें लिखी गई हैं. वास्तव में सराहा मात्र एक माध्यम है. असल में देश में लोगों को अपना मानसिक दीवालियापन दिखाने का एक माध्यम मिल गया है.

यही नहीं, कुछ रिपोर्ट के अनुसार यह ऐप साइबर बुलिंग को बढ़ावा देने की वजह से भी कई लोगों के निशाने पर है. लोग महिलाओं को धमकियां देने के साथ अश्लील टिप्पणियां भी कर रहे हैं. नाम न बताने की शर्त पर एक महिला ने सीसीएम हिंदी को बताया कि सराहा पर अकाउंट बनाने के 24 घंटे के अंदर ही उनको उनके अकाउंट का लिंक फेसबुक से हटाना पड़ गया. उनके अनुसार, अगर अगले कुछ घंटों में अश्लील कमेंट आने बंद नहीं हुए तो वो अकाउंट भी डिलीट कर सकती हैं.

मामला महिलाओं तक ही सीमित नहीं है. ऐसे कई यूजर हैं जो सराहा पर आ रहे ऊटपटांग मैसेज की वजह से परेशान हैं.

सराहा अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ईमानदारी. पर शायद स्पैम कर रहे है यूजर इसी बात को भूल गए हैं. किसी महिला को परेशान करना या इस बात का फायदा उठाना कि आपको कोई पकड़ नहीं पायेगा और आप कुछ भी लिख सकते हैं, यह ईमानदारी तो बिलकुल भी नहीं है.

किसी ऐप का सहज इस्तेमाल करना अच्छा है. लोगों से दिल की बातें शेयर करना भी अच्छा है. पर मानसिक विकार को साधना गलत है. यही सराहा के विकास में अड़ंगा भी लगा सकता है.

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