फेसटैगर ऐप ने ढूंढ़ निकाले 100 लापता बच्चे

Swarnkanta - 8 जुलाई, 2017 - पूर्वाह्न 11:34 IST बजे

फेसटैगर ऐप ने ढूंढ़ निकाले 100 लापता बच्चे

फेसटैगर मोबाइल ऐप ने भारत में तकरीबन 100 से अधिक लापता बच्चों की पहचान की है.

(CCM) — चेहरे की पहचान करने वाले मोबाइल ऐप Facetagr ने अब तक मानव तस्करी का शिकार हुए 100 से अधिक बच्चों को ढूंढ निकाला है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट से ये जानकारी पता चली है.

फेसटैगर एक मोबाइल ऐप है जो चेहरे को पहचानने में मदद करता है. आप इसके जरिए एक खास तस्वीर को लाखों तस्वीरों में से कुछ ही पल में ढूंढ़ सकते हैं. यह आईओएस और एंड्रॉयड दोनों तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम में काम करता है.

1988 के फरवरी में कृष्णा और उसका भाई एस वेंकटेशन छुपा-छुपी खेल रहे थे. तब उनकी उम्र 10 साल थी. चेन्नई में पूर्वी तंब्रम के एक इलाके में खेलता हुआ वेंकटेशन अचानक गायब हो गया.

आज 28 साल के बाद कृष्णन, जो अब अमेरिका में बस चुके हैं, ने भाई के मिलने की आस में न जाने कितनी बार फोटो अपलोड किए, शेयर किए. फिर उन्हें अदयार में एक ऑफिस का पता चला. हालांकि उनकी कोशिश अभी तक कामयाब नहीं हुई पर वहां वे आईटी पेशेवर विजय और उनकी टीम के संपर्क में आए. वे लोग लापता बच्चों का पता लगाते हैं. इस काम में वे चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर की मदद लेते हैं.

विजय और उनकी टीम लगभग एक साल से कई राज्यों की और केंद्रीय वेबसाइटों तथा सोशल नेटवर्किंग साइटों के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने अब तक तीन लाख बच्चों की तस्वीरों का बैंक बनाया है. इनमें से कुछ सरकारी होम्स में हैं तो कुछ अपने परिवार से बिछड़े बच्चे हैं.

विजय कहते हैं, "आप जैसे ही किसी बच्चे का फोटो फीड करते हैं, हमारा सॉफ्टवेयर अपने आप उसे हमारे डाटाबेस में मौजूद बच्चों की तस्वीरों से मिलान करता है." उन्होंने 4 साल के एक बच्चे के बारे में बताया जो इलाहाबाद में भीख मांगता था. उन्हें उसके बारे में फेसबुक से पता चला. यह तस्वीर केंद्र के ट्रैक चाइल्ड पोर्टल की तस्वीर से मेल खाती थी. यह बच्चा हरियाणा में माता-पिता से बिछड़ गया था.

आज देश भर के करीब 100 बच्चों को फेसटैगर ऐप की मदद से पहचाना गया और उन्हें उनके घर पहुंचाया गया. विजय की टीम तमिलनाडु में एंटी-चाइल्ड ट्रैफिकिंग और सोशल डिफेंस डायरेक्टर से बात कर रही है कि वे अपने ट्रैकिंग सिस्टम में इस ऐप को शामिल करें. साथ ही यह टीम एक प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है. इस प्रोजेक्ट के जरिए यह टीम नेपाल से भारत में की जा रही तस्करी के दौरान छुड़ाए गए करीब 15,000 बच्चों के परिवार की तलाश में जुटी है.

केंद्र सरकार की वेबसाइट 'खोया पाया' (लॉस्ट एंड फाउंड) लापता बच्चों को रजिस्टर करती है. यह वेबसाइट आम लोगों की शिकायत दर्ज करता है. ट्रैक चाइल्ड अगवा या लापता बच्चों को खोजने के लिए पुलिस, सरकार और चैरिटी के बीच तालमेल बिठाने वाली एक सरकारी संस्था है.

दो लाख से अधिक तस्वीरों में से एक का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है. विजय बताते हैं, कई बार तो बच्चे के नाम की स्पेलिंग लॉस्ट एंड फाउंड पेज पर मौजूद नाम से मेल ही नहीं खाती. फिर लिंक नहीं मिल पाता. इसके अलावा यदि किसी परिवार के पास बच्चे की तस्वीर नहीं हो तो उसके भाई-बहन की तस्वीर की भी मदद से भी टीम बच्चे का पता लगा लेती है.

Photo: © iStock.