अब बिना बैटरी चलेंगे स्मार्टफोन!

Swarnkanta - 7 जुलाई, 2017 - अपराह्न 02:14 IST बजे

अब बिना बैटरी चलेंगे स्मार्टफोन!

अमरीका में वैज्ञानिकों ने ऐसा सेलफोन बनाया है जो बिना बैटरी के चलता है.

(CCM) — अमरीका में वैज्ञानिकों ने शोध की मदद से एक सेल फोन तैयार किया है. यह फोन जीरो बैटरी पर काम करता है. इन शोधविज्ञानियों में एक भारतीय मूल का वैज्ञानिक भी शामिल है. बैटरी की जगह यह आस-पास मौजूद रेडियो सिग्नल या लाइट से एनर्जी लेता है.



अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर श्याम गोलकोता ने बताया, "हमने ऐसा फोन तैयार किया है जो जीरो बैटरी पर चलता है. हमें विश्वास है कि यह पहला फोन होगा जिसमें बैटरी नहीं है."

शोधविज्ञानियों के मुताबिक यह फोन बातचीत के दौरान या स्पीकर से आवाज निकलने से होने वाले हल्के वाइब्रेशन या महीन थरथराहट से ऊर्जा लेता है. इस बैटरी फ्री फोन को स्काईप कॉल करके टेस्ट किया गया है.

आमतौर पर एक बैटरी वाला फोन कुछ इस तरह काम करता है कि सेल्यूलर ट्रांसमिशन में एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदला जाता है. इससे ध्वनि ऐसे डिजिटल डाटा में बदल जाती है जिसे फोन समझ सकता है. शोधविज्ञानियों के मुताबिक इस कम्युनिकेशन में बहुत ज्यादा ऊर्जी खर्च होने के कारण ऐसा फोन ईजाद करना हमेशा से असंभव रहा जो आसपास के ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर हो, या उनसे काम चला ले. शोधविज्ञानियों ने अधिक ऊर्जा खपत करने वाली इसी प्रक्रिया को बदला है.

आइए देखते हैं कि बैटरी फ्री फोन कैसे काम करता है. यह फोन पहले वाली प्रक्रिया की जगह अपने माइक्रोफोन या स्पीकर में बन रहे हल्के वाइब्रेशन की मदद लेता है. ये वाइब्रेशन या कंपन फोन सुनने या किसी से बात करने के दौरान बनते हैं.

बैटरी फ्री फोन डिवाइस के माइक्रोफोन के वाइब्रेशन की मदद लेते हुए स्पीच को ट्रांसमिट करता है. ताकि रिफ्लेक्टेड सिग्नल में स्पीच पैटर्न एनकोड हो जाए. फिर स्पीच रिसीव करने के लिए यह एनकोडेड रेडियो सिग्नल, जिसे स्पीकर पिक करता है, को साउंड वाइब्रेशन में बदलता है.

बिना बैटरी के चलने वाले इस फोन का फिलहाल प्रोटोटाइप ही तैयार किया गया है. शोधविज्ञानियों के मुताबिक इस प्रोटोटाइप डिवाइस में यूजर को दो बटन 'ट्रांसमिटिंग' और 'लिसनिंग' मोड के बीच स्विच करने वाले बटन को दबाना होता है.

इस तकनीक में वॉयस को डाटा में बदला जाता है, माइक्रोफोन में होने वाले हल्‍के से वाइब्रेशन को डाटा में बदला जाता है, एक एंटीना इस मोशन को रेडियो सिग्‍नल में बदल देता है जिसमें एक तरह से किसी पॉवर की जरूरत नहीं पड़ती.

शोधविज्ञानियों की टीम ने इसके लिए कस्टम बेस स्टेशन तैयार किया है. यह रेडियो सिग्नल को ट्रांसमिट और रिसीव करेगा.

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की शोधविज्ञानी वामसी ताल्ला का कहना है, "हो सकता है कि भविष्य में सभी सेल टावर या वाईफाई राउटर्स हमारे बुनियादी वेबस्टेशन में समा जाएं. फिर जिस भी घर में वाईफाई राउटर होगा वहां बैटरी फ्री सेलफोन काम कर सकेंगे."

यह शोध एसोसिएशन फॉर कंप्यूटिंग मशीनरी ऑन इंटरएक्टिव, मोबाइल, वियरेबल एंड ऊबिक्विटस टेक्नोलॉजी से जुड़ी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

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