आतंकवाद के खिलाफ फेसबुक ने भी कमर कसी

Swarnkanta - 19 जून, 2017 - अपराह्न 09:10 IST बजे

आतंकवाद के खिलाफ फेसबुक ने भी कमर कसी

फेसबुक को अब हर आतंकवादी गतिविधि की खबर होगी. वह अपने प्लेटफार्म को और सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है.

(CCM) — आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखने और उनसे निपटने के लिए फेसबुक ने एक नया कदम उठाया है. फेसबुक ने ऐलान किया है कि वह आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की मदद से आतंकवादियों के हर पोस्ट और एक्टिविटी पर नजर बनाए हुए है.

फेसबुक अब आतंकियों को अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करने देगा. यह फैसला फेसबुक लाइव में होने वाली मौतों और हिंसा की घटनाओं के प्रसारण के बाद लिया गया.

ज़करबर्ग के अनुसार समीक्षकों की एक बड़ी टीम होने पर अनुचित सामग्री को हटाया जा सकता है और खतरे में आने वाले लोगों की रेस्पोंस रेट को संभवतः बढ़ाया जा सकता है.

पहल लेते हुए फेसबुक ने 'हार्ड क्वेश्चन' थ्रेड की बात की है. यह इस तरह के संवेदनशील और मुश्किल विषय पर बात करने के लिए एक सुरक्षित जगह है. इस थ्रेड में फर्स्ट पोस्ट का टाइटल 'हाऊ वी काउंटर टेरोरिज्म' है. मोनिका बिकर्ट ने इसे लिखा है. मोनिका फेसबुक ग्लोबल पॉलिसी मैनेजमेंट की निदेशिका हैं.

दूसरी ओर ब्रायन फिशमैन, जो आतंकवाद विरोधी नीति प्रबंधक हैं, ने एक ब्लॉग पोस्ट में विस्तार से बताया कि आतंकवादियों के लिए प्लेटफार्म के रूप में फेसबुक को कैसे प्रतिबद्ध किया गया है.

पोस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग की कई मौजूदा रणनीतियां के बारे में बताया गया है. इमेज मैचिंग इनमें से एक है. इमेज मैचिंग में सिस्टम यह पता लगाता है कि किसी की ओर से अपलोड की गयी कोई पोस्ट टेररिज्म या आतंकवादी सामग्री से मेल खाती है या नहीं. अगर वो टेररिज्म कंटेंट से मेल खाती है तो उसे फेसबुक से हटा दिया जाएगा.

इसका फायदा ये होगा कि इन फोटो और वीडियो को दूसरे अकाउंट में पोस्ट करने से रोका जा सकेगा. इसी तरह अभी फेसबुक की ओर से एक और प्रयोग किया जा रहा है. इसमें टेक्स्ट-बेस्ड सिग्नल्स को समझ कर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पहले रिमूव किए गए टेक्स्ट्स का विश्लेषण किया जाएगा. विश्लेषण करने से ऐसी पोस्ट्स को और भी जल्दी हटाया जा सकता है. इससे अल्गोरिथम सही ढंग से काम करेगा.

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से आंतकवाद से जुड़ी पोस्ट को हटाने में अभी भी इंसानी विवेक और फैसले की जरूरत है. क्योंकि तभी ऐसे मसलों पर नजर रखी जा सकती है. इसलिए एक कम्युनिटी ऑपरेशन टीम बनाई गई है जो 24 घंटे इस पर दिन रात काम करेगी और नजर रखेगी. इतना ही नहीं इसके सदस्य कई तरह की भाषाओं को समझने में भी माहिर होंगे. कंपनी ने विशेष योग्यता वाले बहुत लोगों को टेररिज्म टीम में शामिल किया है. इनमें फॉर्मर प्रॉसिक्यूटर्स से ले कर इंजीनियर तक शामिल है. वे टेररिज्म कॉउंटरिंग पर नजर रखेंगे.

सीईओ मार्क ज़करबर्ग की ओर से इस घोषणा के बाद फेसबुक ने अपने कर्मचारियों पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है. वह दुनिया भर में 3000 कर्मचारियों को और जोड़ना चाहता है ताकि इस विषय पर गंभीरता से काम किया जा सके.

आतंकवादी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए फेसबुक माइक्रोसॉफ्ट, यूट्यूब, और ट्विटर सहित शोधकर्ताओं, सरकारों और अन्य कंपनियों के साथ साझेदारी जारी रखना चाहती है.

Image: © I AM NIKOM - Shutterstock.com
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