फायरबॉल मालवेयर का खतरा भारत पर भी

Swarnkanta - 7 जून, 2017 - अपराह्न 02:56 IST बजे

फायरबॉल मालवेयर का खतरा भारत पर भी

वानाक्राई मालवेयर के बाद अब एक नए और खतरनाक मालवेयर ने करोड़ों कंप्यूटर को अपना शिकार बना लिया है.

(CCM) — जहां एक ओर दुनिया भर की कंपनियां वानाक्राई नाम के मालवेयर के हमले से अभी ठीक से उबरी भी नहीं थी कि एक और मालवयेर का पता चला है जिसने अब तक करोड़ों कंप्यूटर को अपना शिकार बना लिया है.

सुरक्षा कंपनी चेक प्वाइंट के अनुसार इस मालवेयर से दुनिया भर में अब तक 25 करोड़ कंप्यूटर प्रभावित हो चुके हैं. भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है.

वायर्ड डॉट कॉम ने शुक्रवार की रिपोर्ट में कहा है कि 'फायरबॉल' को ब्राउजर को हैक करने के लिए डिजायन किया गया है. यह डिफाल्ट सर्च इंजन गूगल को बदल देता है और बीजिंग स्थित डिजिटल मार्केटिंग फम राफोटेक की तरफ से प्रभावित यूजर के वेब ट्रैफिक की निगरानी करता है.

फर्म ने यह भी कहा कि इस मालवेयर से प्रभावित मशीन पर किसी भी प्रकार के कोड को दूर बैठे ही रन करने तथा नए द्वेषपूर्ण फाइलों को डाउनलोड करने की क्षमता है.

चेक प्वाइंट के शोध दल के प्रमुख माया होरोविट्ज का कहना है, "25 करोड़ के करीब कंप्यूटर बड़ी आसानी से इस मालवेयर के शिकार हो सकते हैं. यह मालवेयर कंप्यूटरों के एक्सेस के लिए बैकडोर सॉफ्टवेयर इंस्टाल कर देता है, जिसकी मदद से मॉलवेयर हमला करने वाले चीन के हैकर आसानी से उनका फायदा उठा सकते हैं."

चेकप्वाइंट ने अपने ग्राहकों के नेटवर्क के विश्लेषण के आधार पर अनुमान लगाया है कि दुनिया भर में कॉरपोरेट नेटवर्क के पांच में से एक कंप्यूटर इस मालवेयर से प्रभावित हैं.

यदि आपको पता करना हो कि आपका पीसी तो कहीं इस मालवेयर से प्रभावित नहीं है. तो चेक प्वाइंट के मुताबिक, फायरबॉल मालवेयर स्कैन करने का एक तरीका है कि आप अपने ब्राउजर का डिफॉल्ट होम पेज और सर्ज इंजन चेक करें. यूजर्स को सारे ब्राउजर एक्सटेंशन चेक करने होंगे और यह देखना होगा कि वे डिफॉल्ट सर्च इंजन बदल पा रहे हैं या नहीं. अगर आप डिफॉल्ट सर्च इंजन बदल नहीं पा रहे तो आपका सिस्टम मालवेयर से इंफेक्टेड है.

तो पीसी से फायरबॉल मालवेयर कैसे हटाया जा सकता है? सिस्टम इंफेक्शन मालूम चलते ही कंट्रोल पैनल में प्रोग्राम्स और फीचर्स लिस्ट में जाएं. कम्प्रोमाइज्ड एप्लीकेशन को अनइंस्टॉल कर दें.

मैक ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर्स को भी एप्लीकेशन ट्रैश करनी होगी. हालांकि, जरूरी नहीं है कि यूजर्स प्रोग्राम को लिस्ट में ढूंढ पाएं.

Photo: © iStock
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