ऐसा इयरफोन जो छेड़खानी होने से बचाता है

RanuP मंगलवार 1 नवम्बर, 2016 को अपराह्न 015423 बजे

ऐसा इयरफोन जो छेड़खानी होने से बचाता है

कुछ भारतीय लड़कों ने एक ऐसा इयरफोन बनाया जो बुरे वक्त मे काफी काम आ सकता है.

(CCM) — चार भारतीय स्टूडेंट ने एक ऐसा इयरफोन बनाया है जो बुरे समय में खुद ही मदद वाला मैसेज घरवालों को भेज देता है. इसके लिए यूजर को अपने फोन जेब से बाहर निकालने की जरुरत भी नही पड़ेगी. यह सिस्टम सारा काम खुद करता है.

दरअसल मार्केट मे उपलब्ध सभी प्रकार की इमरजेंसी ऐप की सहायता से डिस्ट्रेस सिग्नल भेजने के लिए यूजर को फोन मे SOS बटन स्वयं दबाना पड़ता है. इसी के बाद ऐप अपना काम शुरू करती है. पर इस नई डिवाइस पूरी तरह से ऑटोमैटिक है. यह स्वयं दिमाग के तरंगों को पढ़ लेता है.

इस डिवाइस को नितीश वशिष्ट, फौस्य अमाल, अतुल राज एवं जोर्ज मैथ्यू नाम के इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने बनाया है. यह न्यूरोबड्स नाम के सिस्टम पर चलता है जो ईसीजी तकनीकी पर चलता है. यही दिमाग और डिवाइस के बीच कनेक्शन स्थापित करता है. यह सिस्टम दिमाग की तरंगों की सहायता से पकड़ लेता है कि यूजर परेशान है, खुश है या डरा हुआ है. जैसे ही भयभीत, घबराने वाला सिग्नल डिटेक्ट होता है, यह स्वयं मोबाइल को एक्टिवेट कर देता है. एक बार सिग्नल डिटेक्ट के बाद यूजर के बाद 10 सेकेण्ड का वक्त होता है जिसमे वो सिग्नल को आगे सर्वर तक जाने से रोक सकता है.

इन् चार स्टूडेंट की एक मित्र को किसी ने छेड़ने की कोशिश की थी. उस वक्त वह लड़की अपने जेब से फोन बाहर भी नहीं निकाल सकी थी. इसी के बाद इन् चार स्टूडेंट ने ऐसे किसी सिस्टम पर काम करना शुरू किया जो पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो.

इस सिस्टम के बारे मे बताते हुए मैथ्यू ने बताया कि, "इस डिवाइस मे कानों मे चार इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं जो लगातार मोबाइल फोन से कनेक्टेड रहता है. लगातार दिमाग की तरंगों को पढता है. बड़ी मशक्कत के बात पैनिक की अवस्था को एल्गोरिदम मे बदला गया है."

Photo: © Tusumaru - Shutterstock
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