गूगल पर 'भ्रूण पहचान' से जुड़ा सर्च करेंगे तो फंसेंगे

RanuP मंगलवार 20 सितम्बर, 2016 को पूर्वाह्न 114436 बजे

गूगल पर 'भ्रूण पहचान' से जुड़ा सर्च करेंगे तो फंसेंगे

कोख में पल रहे भ्रूण की पहचान के लिए इंटरनेट पर सर्च करने वाले यूजर फंस सकते हैं.

(CCM) — सुप्रीम कोर्ट ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट एवं याहू को झाड़ते हुए कहा है कि ऐसे मां-बाप जो सेक्स डिटरमिनेशन टेस्ट के लिए इंटरनेट एवं सर्च इंजन का सहारा ले रहे हैं उनको एक कड़ा संदेश दिया जाए. इसलिए कोर्ट ने कई सारे की-वर्ड को इकठ्ठा करना के आदेश दिए हैं.

यदि इन सभी की-वर्ड की सहायता से कोई भी सर्च किया जाता है तो वह वेबसाइट अपने आप ही ब्लॉक हो जाएगी. साथ ही स्क्रीन पर एक मैसेज भी आएगा. अंग्रेजी में लिखा होगा: "nothing would be reflected" यानी "आपको कुछ भी नही दिखेगा".

सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 42 अलग-अलग सर्च की-वर्ड की एक लिस्ट तैयार कर ली है. अंग्रेजी में इसमें सबसे ज्यादा आम की-वर्ड हैं: 'gender selection', 'prenatal sex determination', 'baby gender selection', 'sex selection', आदि. मंत्रालय अगले कुछ दिनों में ऐसे और कई की-वर्ड के साथ कोर्ट के सामने पेश होगा.

यह मामला सबसे पहले तब सामने आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए केन्द्र को तत्काल सर्च इंजन साइटों के खिलाफ कदम उठाने को कहा.

दरअसल ये सर्च इंजन साइट बतौर विज्ञापन फीटल जेंडर डिटरमिनेशन किट एवं क्लिनिक का पता दिखा रहे थे. हालांकि ये सभी क्लिनिक एवं किट विदेशी कंपनियों के थे.

तब 15 जुलाई को, कोर्ट ने कहा था कि यह भारतीय कानून का उल्लंघन है. जवाब में सॉलिसिटर जनरल रणजीत कुमार ने कहा कि इन कंपनियों ने ऐसी कोई तकनीक विकसित ही नहीं की है जिससे ऐसे विज्ञापनों पर लगाम लग सके.

आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल 5 लाख भ्रूण कोख में ही मार दिए जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट में इस केस की याचिका साबू मैथ्यू जॉर्ज ने दायर की थी.

Photo: © Evan Lorne - Shutterstock.com
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