जकरबर्ग ने किया फ्री बेसिक सर्विस का बचाव

Swarnkanta - 29 दिसम्बर, 2015 - अपराह्न 10:16 IST बजे

जकरबर्ग ने किया फ्री बेसिक सर्विस का बचाव

फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपनी कंपनी की इंटरनेट सेवा का बचाव किया है.

जकरबर्ग ने टाईम्स ऑफ इंडिया अखबार में लिखा, "हर समाज में कुछ ऐसी बुनियादी सेवाएं होती हैं जो लोगों की भलाई के लिए बेहद अहम होती हैं. और ये भी जरूरी होता है कि ये सेवाएं लोगों के लिए मुफ्त उपलब्ध हो."

जकरबर्ग ने फेसबुक की मुफ्त (लेकिन सीमित) सेवा फ्री बेसिक इंटरनेट सर्विस की तुलना लाइब्रेरी, सार्वजनिक अस्पताल, और बुनियादी शिक्षा से की है. संभव है कि ये बेहतर विकल्प न हों, लेकिन इंटरनेट की ही तरह ये सेवाएं मददगार हैं और उन लोगों के लिए उपयोगी हैं जो कुछ मूल सुविधाओं को वहन करने में सक्षम नहीं होते.

मार्क कहते हैं, " हम जानते हैं कि इंटरनेट से जुड़ा हर दसवां व्यक्ति मोटे तौर पर गरीब है. हम ये भी जानते हैं कि भारत की प्रगति के लिए ये जरूरी है कि 1 अरब भारतीय इंटरनेट से जुड़ें. ये कोई नियम या सिद्धांत नहीं है, बल्कि ये तथ्य है, सच्चाई है."

यही वजह है कि दुनिया भर के 30 से अधिक देशों ने फेसबुक सर्विस को "उपभोक्ताओं के लिए अच्छा और नेट न्यूट्रेलिटी के साथ सुसंगत" माना है.

लेकिन सभी इस विचार से सहमत नहीं हैं. भारत में कुछ लोगों का तर्क है कि फ्री बेसिक, जिसका नाम पहले इंटरनेट डॉट ओआरजी यानी Internet.org था, नेट न्यूट्रैलिटी को नजरअंदाज करता है. क्योंकि नेट न्यूट्रेलिटी कहती है कि सारी इंटरनेट ट्रैफिक के साथ सामान्य रूप से व्यवहार होना चाहिए.

कहा जा रहा है कि फ्री बेसिक के साथ केवल कुछ सर्विस ही फ्री में मिलेंगीं. थर्ड पार्टी फ्री बेसिक के लिए आवेदन कर सकती है लेकिन अंततः फैसला लेने का अधिकार फेसबुक का है.

जकरबर्ग कहते हैं कि सर्विस के खिलाफ सारे दावे झूठे हैं और यूजरों से आग्रह करते हैं कि वे ट्राई को भारत में लाने की सिफारिश करें.

उनका कहना है, "फ्री बेसिक के इस्तेमाल से लोगों को दूर रखने का कोई वैध आधार नहीं है. सभी को हक है कि वे इंटरनेट की इस्तेमाल करें. और फ्री बेसिक इंटरनेट सर्विस इसमें आपकी मदद कर सकता है."

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