एप्पल और ट्राई के बीच इस ऐप ने मचाया बवाल

RanuP - 7 सितम्बर, 2017 - अपराह्न 12:18 IST बजे

एप्पल और ट्राई के बीच इस ऐप ने मचाया बवाल

अपने अगले फोन के लॉन्च से पहले एप्पल ने न चाहते हुए भी टेलिकॉम रेगुलेटर ट्राई से एक पंगा ले लिया है.

(CCM) — एप्पल और भारत की टेलिकॉम रेगुलेटर संस्था ट्राई एक बार फिर से आमने सामने हैं. ट्राई के अनुसार एप्पल उनकी एंटी-स्पैम ऐप को मान्यता नहीं दे रहा है. यह ऐप इंस्टाल होने के बाद यूजर के डाटा, कॉन्टैक्ट को एक्सेस करती है.



दरअसल एप्पल को इसी बात से समस्या है कि ट्राई यूजर डाटा को एक्सेस करना चाहती है. यह लड़ाई पिछले कई सप्ताह से चल रही है. पर इस ऐप से जुडी बाते अब सामने आई हैं. ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा कुछ सप्ताह पहले भी एप्पल पर निशाना साध चुके है.

एप्पल की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है. पर ऐसा सम्भव है कि अमेरिकी कंपनी को यह ऐप यूजर की प्राइवेसी के लिए एक बड़ा रिस्क जैसा लगे. शर्मा ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि "एप्पल को अपनी प्राइवेसी पॉलिसी के साथ खिलवाड़ करने के लिए किसी ने नहीं कहा. पर किसी भी कंपनी को यूजर के डाटा का सर्वेसर्वा नहीं बनना चाहिए."

ट्राई का एंटी-स्पैम ऐप एंड्रॉयड के प्लेस्टोर पर पहले ही लाइव किया जा चुका है. यह ऐप काम और इंटरफेस के मामले में उतना भी अच्छा नहीं है. इसकी सहायता से यूजर किसी नंबर को या मैसेज को स्पैम रिपोर्ट कर सकते हैं.

इंटरफेस से लोग इतने असतंतुष्ट हैं कि प्लेस्टोर पर इसको रेटिंग भी बहुत अच्छी नहीं है. स्पैम को रिपोर्ट करने के लिए यूजर ट्रू कॉलर जैसे ऐप पर ज्यादा निर्भर हैं.

रिपोर्ट के अनुसार इस ऐप के मामले पर ही ट्राई के अधिकारी ऐप्पल से कई बार मिल चुके हैं पर अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है. शर्मा ने बताया कि यह ऐप इसीलिए बनाया गया है ताकि एप्पल फोन यूजर स्पैम कॉल से जुडी समस्या को भारत के रेगुलेटर तक सीधे पंहुचा सकें. उन्होंने कहा, "यह बहस ट्राई और एप्पल के बीच नहीं बल्कि एप्पल और उसके यूजर के बीच की है."

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