कैंसर के शुरुआती लक्षण पहचान लेगा ये सेल्फी ऐप

Swarnkanta - 4 सितम्बर, 2017 - अपराह्न 08:20 IST बजे

कैंसर के शुरुआती लक्षण पहचान लेगा ये सेल्फी ऐप

यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के शोधकर्ताओं की टीम एक ऐसा ऐप तैयार कर रही है जिससे पैंक्रियाज कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचाना जा सकेगा.

(CCM) — कंप्यूटर वैज्ञानिकों और मेडिकल क्लिनिशंस की टीम वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में एक विशेष ऐप डेवलप कर रही है. बीबीसी रिपोर्ट के मुताबिक इस ऐप का नाम बिलिस्क्रीन है. इसे कंप्यूटिंग कॉन्फ्रेंस यूबीकॉम्प 17 में पेश करने की योजना है.

जानी मानी कंपनी ऐप्पल के सहसंस्थापक स्टीव जॉब्स की मौत पैंक्रियाज के कैंसर की वजह से हुई थी. यह कैंसर कुछ जटिल तरह के कैंसरों में से है. यदि शुरुआती चरण में ही इसके लक्षणों को पहचाना और उसका इलाज किया जा सके तो बड़ी संख्या में मरीजों की जान बचायी जा सकती है.

बिलिस्क्रीन सेल्फी की मदद से पैंक्रियाटिक कैंसर की जानकारी दे दैगा. बिलिस्क्रीन एक स्मार्टफोन कैमरा, एक स्पेशल एल्गोरिदम और मशीन लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल करता है ताकि व्यक्ति के स्क्लेरा या आंख के सफेद भाग में बढ़े बिलीरुबिन के स्तर का पता लगा सके.

पैंक्रियाज कैंसर अग्नाशय को अपना शिकार बनाता है. हालांकि, इसके मामले स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, हड्डियों का कैंसर के मुकाबले बहुत कम पाए जाते हैं.

कैंसर के शुरुआती लक्षण की बात करें तो जॉन्डिस को हम प्राथमिक लक्षण मानते हैं. जॉन्डिस हमारे खून में बिलिरूबीन के बनने के कारण होता है. इसमें हमारे स्किन और आंखों का रंग पीला पड़ने लगता है. लेकिन आंखों का पीलापन हमें जब तक नंगी आंखों से पता चले, यह बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होगी. ऐसे में यह एेप इस बीमारी के प्राथमिक चरण का पता लगाने में सक्षम होगी.

शोधविज्ञानियों की टीम ने 70 लोगों पर अध्ययन किया. इस दौरान बिलिस्क्रीन एप को एक 3डी प्रिटेंड बॉक्स के साथ इस्तेमाल किया गया. इसने आंखों पर पड़ने वाली रोशनी को कंट्रोल किया और बीमारी को पहचानने में ब्लड टेस्ट के मुकाबले 89.7 प्रतिशत कामयाब साबित हुआ.

ऐप को बनाने की प्रेरणा शोधविज्ञानियों को बिली कैम के जरिये मिली. इसे यूडब्लू के यूबीक्यूअस लैब में तैयार किया गया है. इसकी मदद से नवजात शिशुओं में पोलियो की पहचान की जाती है. बिलीरुबिन स्तर का पता लगाने के लिए जो ब्लड टेस्ट किया जाता है वो बड़ों में आमतौर पर तब तक नहीं किया जाता जब तक कि कोई गंभीर बीमारी ना है. ऐसे में बिलिस्क्रीन आपकी मदद करेगा. बिलिस्क्रीन यह तय करने में भी मदद करता है कि आगे के परीक्षण के लिए किसी को डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए या नहीं.

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