क्रॉस चैनल मार्केटिंग और उसके तरीकों के बारे में जानिए

दिसम्बर 2016

जैसे जैसे इंटरनेट का असर बढ़ रहा है लोगों की खरीददारी की आदतें भी बदल रही हैं. ऐसे में कई ऑनलाइन रिटेलर और पेशवरों ने खास क्रॉस-चैनल अपना रहे हैं. यह तकनीक खरीददारी करने मौका देती है और इसके अनुभव को बेहतर बनाती है. यदि इस रणनीति को अच्छे तरीके से लागू किया जाए तो यह उन सारी बाधाओं को खत्म कर सकता है जो ई-कॉमर्स और फिजिकल कॉमर्स के बीच मौजूद है. यह इसके लिए कई तरह के संचार माध्यमों को आपसे में मिलाता है और एक चैनल और प्रक्रिया में बदल देता है.


इस लेख में हम आपको क्रॉस-चैनल मार्केटिंग की बुनियादी बातों के बारे में बताएंगे और एक असरदार क्रॉस-चैनल रणनीति बनाने के लिए जरूर उपाय जानेंगे.



क्रॉस-चैनल रणनीति की बुनियादी बातें

यदि शुरू से शुरुआत करें तो क्रॉस-चैनल रणनीति किसी कंपनी को पूरी खरीददारी के दौरान अपने ग्राहकों को सहयोग करने और मार्गदर्शन करने का मौका देती है. इस रणनीति का मकसद परचेजिंग आउटलेटों (चाहे वो ऑनलाइन हो या फिजिकल स्टोर हो) के बीच के सहयोग के साथ ही साथ एक उद्यम और इसके ग्राहकों के बीच एक तरह का संवाद शुरू करता है.


क्रॉस-चैनल रणनीति की मदद से एक ऑनलाइन दूकानदार अपने ग्राहकों के लिए सभी तरह के कम्यूनिकेशन और प्रोमोशनल चैनल का दरवाजा खोल देता है. इससे वर्चुअल और इन-स्टोर खऱीददारी के अनुभव के बीच अपने आप एक रिश्ता बन जाता है. ई-कॉमर्स साइटें जो उत्पादों को बेहद आकर्षक तस्वीरों और भरोसेमंद जानकारी के साथ पेश करती हैं उनके फिजिकल स्टोर में अधिक ग्राहक आने लगते हैं जो और अधिक जानकारी लेना चाहते हैं. एक ग्राहक कहां अपनी अंतिम खरीददारी करता है इसके बावजूद पूरक चैनलों के इस्तेमाल से ग्राहकों की खरीददारी का अनुभव बेहतर होता है. उनकी संतुष्टि बढ़ती है.

क्रॉस-चैनल खरीददारी की चुनौतियां

ग्राहकों की आदतें हाल के वर्षों में काफी बदली हैं. वे पहले से अधिक जानकारी रखने लगे हैं. खास ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, फोरम, कीमत की तुलना करने वाली साइटें. इन सबने ग्राहक को बेहतर तरीके से खरीददारी करने में मदद की है. लेकिन कई बार ये जानकारियां उद्योग के आड़े आती हैं. कंपनियां अक्सर कीमत और खराब ऑनलाइन प्रोडक्ट रीव्यू के कारण उन्हें अधिक प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है. यही नहीं, मोबाइल और टेबलेट पर खरीददारी का ट्रेंड बढ़ने से खराब इन-स्टोर प्रदर्शन किसी कंपनी के कुल फायदे पर बुरा असर डालता है.


इन सभी कारणों को ख्याल में रखते हुए, क्रॉस-चैनल तकनीक को बढ़ावा देना इसे समझना बेहद जरूरी हो गया है. क्रॉस-चैनल रणनीति को लागू करना एक चुनौती तो है. लेकिन एक बार सफल हो जाने पर यह नए संभावनाओं के द्वार खोलती है.

क्रॉस-चैनल मार्केटिंग का मकसद

क्रॉस-चैनल मार्केटिंग रणनीती ऐसी होनी चाहिए जो web-to-store behavior को बढ़ावा दे. इसमें किसी ग्राहक के प्रोडक्ट के पहले लुक से उसकी खरीददारी तक का व्यवहार शामिल होता है.


जब इस तरह की रणनीति बनाई जाती है तो एक कंपनी को ये चार खास मापदंडों का ख्याल रखना चाहिए: मल्टी-चैनल प्रेजेंस (यानी बाजार में अलग अलग जगहों पर अपनाए गए "storefronts"),मोबाइल एडाप्टेशन (यानी, मोबाइल साइट या डेडिकेटेड ऐप्लिकेशन का उपलब्ध होन), सोशल नेटवर्क प्रेजेंस (यानी प्रोडक्ट और सर्विस का प्रदर्शन करना और कस्टमर के साथ बातचीत करना), और फिजिकल स्टोर (यानी kiosks या टच स्क्रीन डिस्पले) में इनोवेशन.


इस क्रॉस-चैनल अनुभव की महत्वपूर्ण बात है आउटलेट और पार्टीज के बीच संपूर्ण तालमेलस.

क्रॉस-चैनल मार्केटिंग के उदाहरण

सोशल नेटवर्क मार्केटिंग

ई-कॉमर्स आउटलेट के अलावा, क्रॉस चैनल को बढ़ावा देने वाली रणनीतियों में सोशल नेटवर्क को भी शामिल किया जााना चाहिए. प्रोड्कट को प्रोमोट करने में यह एक अच्छा साधन साबित होता है. सोशल नेटवर्क के कारण ग्राहकों के साथ सीधा संबंध स्थापित करने में सुविधा होती है, उनसे एक रिश्ता कायम हो जाता है. यदि आपकी कंपनी अब तक सोशल मीडिया पर नहीं है तो आप एक अच्छा चैनल चुनने के लिए हमारे "हाऊ-टूज" सेक्शन में जाकर सोशल चैनल में जाकर जानकारी हासिल कीजिए.

जियोलोकेशन रणनीति

जियोफेन्सिंग रणनीति चुने हुए क्षेत्र (जिसे जियोफेंस भी कहा जाता है) में मोबाइल फोन के लोकेशन रणनीति का इस्तेमाल करती है. इन सेवाओं के जरिए किसी फिजिकल स्टोर में जाने, खरीददारी के लिए डील, कूपन और प्रोमोशन के लिए जियोलोकेशन के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है. इन प्रैक्टिस को Yelp और Foursquare जैसी कंपनियों के पमूल स्टोर में पाया जा सकता है.


जियोफेन्सिंग और यह आपके बिजनेस के लिए कैसे मददगार हो सकता है, ये जानने के लिए दिए गए लिंक पर जाएं.

इंटरैक्टिव Kiosks

Kiosks किसी फिजिकल स्टोर में ग्राहकों को पूरी तरह से पूरक डिजिटल सेवाएं प्रदान करता है. कियोस्क की ओर से सुझाए गए कंटेन्ट को ब्रांड के प्रोडक्ट कैटेलॉग के आस पास तैयार किया जा सकता है. इसमें प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में जानकारी भी शामिल हो सकती है. यही नहीं अाप अपनी जरूरत के मुताबिक बेहतरीन प्रोडक्ट कैसे सुनें या कैसे इंटरैक्टिव वीडियो देखें इसकी भी मदद मिलती है. इस तरह की डिजिटल पेशकश उन उपभोक्ताओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है जो इन-स्टोर में क्या क्या है इसे देखने अनुभव करने के लिए किसी ऑनलाइन अनुभव की तलाश में होते हैं.


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