वाई-फाई नेटवर्क कैसे काम करता है?

सितम्बर 2017

दुनिया भर में वाई-फाई इंटरनेट तक पहुंचने का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है. इस तरह का कनेक्शन पाने के लिए आपके कंप्यूटर में वायरलेस एडॉप्टर होना अनिवार्य है. वाई-फाई वायरलेस कनेक्टिविटी देने के लिए नेटवर्क पर जितना डाटा उपलब्ध है उसके मुताबिक 2.4 GHz से 5 GHz के बीच की ध्वनि तरंगे छोड़ता है. जिस एरिया में वाई-फाई कनेक्टिविटी हो जाती है उसे हॉट-स्पॉट कहते हैं. हॉटस्पॉट का कनेक्शन पाने या उसका पता लगाने के लिए आपको वायरलेसमोन जैसे उन्नत सॉफ्टवेयर की जरूरत होगी. वायरलेस कनेक्शन को शुरू करने के लिए सबसे पहली जरूरत है वायरलेस रूटर. वायरलेस रूटर को पहले इंटरनेट कनेक्शन में जोड़ें और इसके बाद देखें कि सारी जरूरी सेटिंग ठीक से लगी हुई हैं या नहीं.


वाई-फाई क्या है और ये कैसे काम करता है?

हाल ही में वायरलेस तकनीक दुनिया भर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा रही है. अब आप लगभग हर जगह नेटवर्क और इंटरनेट से कनेक्टेड हो. फिर चाहे घर में, दफ्तर में, लाईब्रेरी में, होटल, स्कूल, हवाईअड्डा, यहां तक कि कुछ रेस्तरां में भी.

तो इसी वायरलेस नेटवर्किंग को वाई-फाई (वायरलेस फिडेलिटी) या 802.11 नेटवर्किंग कहते हैं क्योंकि ये IEEE 802.11 तकनीकों को कवर करता है. वाई-फाई का सबसे बड़ा फायदा ये है कि यह लगभग हर ऑपरेटिंग सिस्टम, गेम डिवाइस और उन्नत प्रिंटर के साथ तालमेल बिठा लेता है.

वाई-फाई कैसे काम करता है?

मोबाइल फोन की तरह, नेटवर्क में सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के लिए वाई-फाई नेटवर्क रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करता है. वाई-फाई लगाने के लिए सबसे पहला कदम है कंप्यूटर में वायरलेस एडॉप्टर लगाना जो डाटा को रेडियो सिग्नल के रूप में ट्रांसमिट करेगा. यही सिग्नल एंटीना के जरिए राउटर के नाम से जाना जाने वाला डिकोडर तक भेजा जाएगा. एक बार डिकोड होने पर वह डाटा वायर्ड इथरनेट कनेक्शन की मदद से इंटरनेट को भेजा जाएगा. चूंकि वायरलेस नेटवर्क टू-वे ट्रैफिक जैसा काम करता है इसलिए इंटरनेट से जो डाटा रिसीव होगा वो राउटर से भी गुजरेगा और रेडियो सिग्नल में कोडेड हो जाएगा. फिर इस रेडियो सिग्नल को कंप्यूटर का वायरलेस एडॉप्टर रिसीव कर लेगा.

आवृत्तियां

यूजर जो डाटा भेजता है उसे रुपांतरित (एडॉप्ट) करने के लिए वायरलेस नेटवर्क 2.4 GHz या 5 GHz के आवृत्ति स्तर पर ट्रांसमीट करेगा. जैसा की आगे व्याख्या की गई है कि मानक 802.11 नेटवर्किंग कुछ हद तक यूजर की जरूरतों पर निर्भर करता है.


802.11ए डाटा को 5 GHz के आवृत्ति स्तर पर संचारित करेगा. यहां उपयोग हो रहा ऑर्थोगोनल फ्रीक्वेंसी-डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग (ओएफडीएम) रेडियो सिग्नल को रूटर तक पहुंचने से पहले छोटे-छोटे सिग्नल में विभाजित कर देता है जिससे डाटा रिसेप्शन ज्यादा होता है. आप अधिकतम प्रति सेकेंड 54 मेगाबाइट्स डाटा संचारित कर सकते हैं. वहीं 802.11बी 2.4 GHz के आवृत्ति स्तर पर डाटा संचारित करेगा. ये अपेक्षाकृत धीमी गति है. यहां आप अधिकतम 11 मेगाबाईट्स डाटा प्रति सेंकेड संचारित कर सकते हैं.

इसी प्रकार 802.11जी 2.4 GHz की आवृत्ति स्तर पर डाटा संचारित करेगा. क्योंकि ये ओएफडीएम कोडिंग का उपयोग करता है इसलिए ये लेकिन अधिकतम 54 मेगाबाईट्स प्रति सेकेंड की गति से डाटा को संचारित कर सकता है. तुलनात्मक रूप से अधिक उन्नत 802.11एन अधिकतम 40 मेगाबाईट्स डाटा प्रति सेकेंड संचारित कर सकता है. ये 5 GHz के आवृत्ति स्तर का इस्तेमाल करता है.

हॉटस्पॉट क्या है?

हॉटस्पॉट शब्द का इस्तेमाल उस एरिया को परिभाषित करने के लिए किया जाता है जहां वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध हो. ये या तो घर या रेस्तरां और हवाईअड्डे जैसे सार्वजनिक जगहों पर बंद वायरलेस नेटवर्क होता है. जैसा कि हमने पहले भी कहा है, हॉटस्पॉट की सुविधा पाने के लिए आपके कंप्यूटर में वायरलेस एडाप्टर होना चाहिए. यदि आप नए और आधुनिक लैपटॉप मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो संभवतः इसके भीतर पहले से ही वायरलेस ट्रांसमीटर सुविधा अंतर्निहित होती है. यदि ऐसा नहीं है तो आपको एक वायरलेस एडॉप्टर खरीदना होगा जिसे आप या तो पीसीआई स्लॉट या यूएसबी पोर्ट में प्लग करें. एक बार लग जाने के बाद आपका सिस्टम अपने आप वाई-फाई हॉटस्पॉट को खोज लेगा और कनेक्शन के लिए निवेदन करेगा. अगर ऐसा नहीं है, तो आपको एक ऐसा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करना होगा जो आपके लिए ये काम कर दे. Avanquest Connection Manager को इस लिंक पर डाऊनलोड करें. इसी प्रकार CommView for WiFi को आप इस लिंक पर डाऊनलोड करें. Wirelessmon को आप इस लिंक पर डाऊनलोड करें.

वाई-फाई कनेक्शन कैसे तैयार करें

वायरलेस राउटर से कनेक्ट करने के पहले ये सुनिश्चित कर लें कि यह इंटरनेट कनेक्शन प्वांइट पर प्लग-इन किया हुआ है. राउटर को अपने कंप्यूटर में इथरनेटर केबल के जरिए प्लगिंग करने के पहले आप अपने बाहरी मोडेम को बंद कर दें. ध्यान रहे की वायरलेस राउटर को तब तक ऑन रखें जब तक कि ये पूरी तरह स्टार्ट ना हो जाए और आपका इंटरनेट ब्राउजर खोल न दे. बेल्किन यूजर इस लिंक पर जाकर क्लिक करें. इसी प्रकार लिंकसाइस यूजर इस लिंक पर जाकर क्लिक करें. यदि आप इन दोनों में से किसी सर्विस को इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद आप अपने राउटर का यूजरनेम और पासवर्ड डालें. फिर एसएसआईडी (वायरलेस क्षमता) को सक्रिय करें. अपने आईएसपी की ओर से दिए गए यूजरनेम और पासवर्ड को टाइप करें और या तो वीईपी या वीपीए सेक्यूरिटी को चुनें. फिर नए पास कीज को चुनें.

Photo: © Pixabay.

यह भी पढ़ें

ओरिजिनल आर्टिकल ने पब्लिश किया. Swarnkanta ने अनुवाद किया. ताजा अपडेट: 3 जुलाई, 2017 को अपराह्न 01:14 बजे RanuP ने किया.
CCM (in.ccm.net) पर उपलब्ध यह डॉक्युमेंट "वाई-फाई नेटवर्क कैसे काम करता है?" क्रिएटिव कॉमन लाइसेंस के तहत उपलब्ध कराया गया है. जैसा कि इस नोट में साफ जाहिर है, आप इस पन्ने को लाइसेंस के तहत दी गई शर्तों के मुताबिक संशोधित और कॉपी कर सकते हैं.